शास्त्र क्या होते हैं

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शास्त्र क्या होते हैं
शास्त्र क्या होते हैं

शास्त्र क्या होते हैं :- इस आर्टिकल में आज SSCGK आपसे शास्त्र क्या होते हैं के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। इससे पहले आर्टिकल में आप गीता का उपदेश के बारे में विस्तार से पढ़ चुके हैं।

शास्त्र क्या होते हैं –

भूमिका –

हम सभी ने चार वेदों के अतिरिक्त 6 शास्त्रों के नाम के विषय में कई बार सुन रखा है । लेकिन हमारा हिन्दू समाज आज भी इनसे अनभिज्ञ/अंजान है । ऐसे समय में हमारे आर्य समाज का यह दायित्व बनता है कि हिन्दू अपने प्रत्येक धर्मग्रंथ को अच्छी प्रकार से जाने और समझे ।
हमेंशा से ही आर्य समाज इसी प्रयास में रहा है कि हिन्दू अपने मूल वैदिक धर्म को ठीक से जानकर इससे जुड़ जाएं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर आर्य समाज ने अपनी प्रखर लेखनी के द्वारा हिन्दू जनता में चेतना फैलाई है।

इन 6 शास्त्रों को वेदों के उपांग या दर्शन शास्त्र भी कहा जाता है । हमारे ऋषि मुनियों ने वेदों में यत्र-तत्र बिखरे सिद्धान्तों को संकलित करके इन 6 दर्शन शास्त्रों का निर्माण किया है। इन शास्त्रों के आधार पर हम वेदवाणी को अच्छी प्रकार से समझ सकते हैं । ये 6 वैदिक दर्शन शास्त्र आस्तिक दर्शन कहलाते हैं ।
ये सभी हमारे तर्कशास्त्र हैं। इन्हें पढ़कर हर मनुष्य की बुद्धि प्रखर हो जाती है/खुल जाती है और वह कभी भ्रमित होकर ईश्वर, धर्म, अधर्म, सत्य, असत्य आदि के विषय पर शंका नहीं करता । इन दर्शन शास्त्रों को अध्ययन करके सभी प्रकार की शंकाओं का समाधान स्वयं ही हो जाता है । इन 6 दर्शन शास्त्रों का वर्णन निम्नलिखित है –

नं.1.- न्याय शास्त्र

नं.2.- वैशेषिक शास्त्र

नं.3.- सांख्य शास्त्र

नं.4.- योग शास्त्र

नं.5.- मिमांसा

नं.6.- वेदान्त ( ब्रह्मसूत्र )

Shastra Kya hote hain-

नं.1.- न्याय शास्त्र :- इसकी रचना गौतम मुनि ने की थी । इस शास्त्र का विषय मुख्यतः तर्क है । चार प्रकार
के प्रमाणों ( प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द  ) के द्वारा मनुष्य अपने आसपास बिछे हुए संसार में से सत्य
और असत्य को छाँटकर अलग करके जान पाए इस उद्देश्य से ये दर्शन रचा गया है ।

 

नं.2.- वैशेषिक शास्त्र :- इसकी रचना कणाद मुनि ने की थी । ये शास्त्र पदार्थ विद्या के बारे में है । ईश्वर ने
हमारे लिये संसार के जिन पदार्थों का निर्माण किया है- उनके गुण, कर्म आदि जानकर, उनसे कैसे उपयोग
लेना है ? ये इस शास्त्र का विषय है । ये भौतिक शास्त्र है ।

 

नं.3.- सांख्य शास्त्र :- इसकी रचना कपिल मुनि ने की थी । इसका मुख्य विषय है प्रकृति के सबसे सूक्ष्म
कणों ( सत, रज, और तम से शब्द, स्पर्श, रूप,रस और गन्ध  ) से सृष्टि की उत्पत्ति कैसे होती है ? कैसे
सभी पदार्थों में समानता होते हुए विशेषता है ? ये शास्त्र पूर्ण रूप से प्रकृति और आत्मा में भेद बतलाता है ।

शास्त्र क्या होते हैं-

नं.4.- योग शास्त्र :- इसकी रचना पतंजलि मुनि ने की थी । इसका मुख्य विषय है- आठ मर्यादाओं ( यम,
नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधी ) का पालन करते हुए सभी दुखों से छुटकारा
प्राप्त करते अचानक हुए मोक्ष प्राप्त करने की विधि बताना ।

 

नं.5.- मिमांसा :- इसकी रचना जैमिनी मुनि ने की थी । इसका विषय है – वैदिक कर्मकांड और मर्यादाओं का
पालन करने से मनुष्य पूर्ण सुखी हो सकता है और अपने जीवन के लक्ष्य मोक्ष को पा सकता है ।

 

नं.6.- वेदान्त ( ब्रह्मसूत्र ) :- इसकी रचना बादरायण वेदव्यास मुनि ने की थी । इस शास्त्र का मुख्य विषय है-
ईश्वर के स्वरूप उसके गुणों का वर्णन करना। ईश्वर के गुणों के बारे में जानकर, मनुष्य उनके विषय में सभी
शंकाओं से निवृत होकर, उनकी उपासना में लगे और योगाभ्यास करते हुए उनको प्राप्त प्रयास करें ।

 

ये सभी हमारे 6 वैदिक आस्तिक दर्शन हैं। इन्हें विस्तार से पढ़कर मनुष्य वेद के मन्तव्य ठीक से समझकर
तार्किक होकर अपने मूल धर्म को ठीक से जान सकता है।

स्मरणीय तथ्य-

>यह एक आध्यात्मिक शिक्षा है।

>सभी को वेदों के सिद्धांत को जानना चाहिए।

> ये दर्शनशास्त्र पाखंडों से निकलने का एकमात्र मार्ग हैं।

 >यह दर्शनशास्त्र विद्या-अविद्या, पाप-पुण्य, धर्म-अधर्म,सत्य-असत्य को समझने के लिए में सहायक होते हैं।