हिमस्खलन का अर्थ प्रकार व कारण

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हिमस्खलन का अर्थ प्रकार व कारण
हिमस्खलन का अर्थ प्रकार व कारण

हिमस्खलन का अर्थ प्रकार व कारण – आज इस आर्टिकल में SSCGK आपसे हिमस्खलन का अर्थ प्रकार व कारण के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। इससे पहले आर्टिकल में आप SSC CGL Tier 1 Exam 2019 के बारे में विस्तार से पढ़ चुके हैं।

हिमस्खलन का अर्थ प्रकार व कारण:-

Meaning of An AVLANCHE- हिमस्खलन शब्द दो शब्दों के योग से मिलकर बना है- हिम + स्खलन। हिम का अर्थ होता है बर्फ तथा स्खलन का अर्थ होता है खिसकना। इसका यह अर्थ हुआ बर्फ का खिसकना।

अन्य शब्दों में हिम तथा भारी चट्टानों के अचानक नीचे ढलान की ओर खिसकने को हिमस्खलन कहते हैं|
हिमस्खलन ऐसी किसी जगह पर बहुत अधिक होता है, जो बहुत ही ढलान वाली या एकदम स्लोप वाली
सतह होती है।हिमस्खलन बहुत तेज गति से हिम के बड़ी मात्रा में होने वाले बहाव को कहा जाता हैं।

हिमस्खलन का अर्थ प्रकार व कारण:-

हिमस्खलन की स्थिति आमतौर पर उस समय पैदा होती है, जब किसी ऊँचे क्षेत्र में उपस्थित हिमपुंज/
बर्फ समूह में अचानक अस्थिरता उत्पन्न हो जाती है| जैसे ही ऊँचाई से हिम खिसकना शुरु होने लगता है,
तो बाद में ढलान पर नीचे खिसकता हुआ यह तेज गति पकड़ने लगता है और इस गिरते हुए हिम के अंदर
बर्फ़ की और भी मात्रा शामिल होती जाती है।

आमतौर पर हिम आछादित पर्वतों पर तथा ऊंचे-ऊंचे पर्वत शिखरों पर ही हिमस्खलन की घटनाएं घटित होती हैं ।
इस तरह खिसकता हुआ यह हिम का ढेर एक विशाल भार भरकम रूप ले लेता है| यदि किसी पर्वत की  ढलान
पर  गिरती हुई हिम का भार, चट्टान की क्षमता से बहुत अधिक बढ़ जाता है तो हिमस्खलन की स्थिति पैदा हो जाती है।

Himskhlan ka Arth Prakar evm Kaaran:-

हिमस्खलन के कारण से बिजली के खम्बों, मकानों, सड़कों, रेल की लाइनों तथा पुलों को बहुत भारी
नुकसान होता है|रिहायशी इलाके में बड़ी-बड़ी चट्टानों के गिरने से बहुत-से लोग मारे जाते हैं तथा बहुत से घायल हो जाते हैं ।

हिमस्खलन के प्रकार(Types of Avalanches):- हर साल पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाले हिमस्खलन के प्रमुख
5 प्रकार निन्नलिखित हैं –

No.1.- हिमस्खलन

No.2.-ग्लेशियर या हिमनद हिमस्खलन

No.3.- शुष्क हिमस्खलन

No.4.-आर्द्र हिमस्खलन

No.5.- मलबे के ढेर द्वारा हिमस्खलन

हिमस्खलन का अर्थ प्रकार व कारण:-

No.1.- हिमस्खलन– शरद ऋतु में इस प्रकार के हिमस्खलन ऊँचे-ऊँचे पर्वतीय इलाकों में घटित होते हैं । जब
भी शरद ऋतु में ऊँचे पर्वतीय ढलानों पर बड़ी मात्रा में हिम इकट्ठी हो जाती है, तो यह हिम नीचे की ओर खिसकने
लगती है तथा हिमस्खलन की स्थिति पैदा हो जाती है ।

No.2.-ग्लेशियर या हिमनद हिमस्खलन- ग्लेशियर या हिमनद के अगले भाग जब अचानक हिम टूट कर नीचे
समुद्र या हिमनदी में गिर जाते हैं, तो इस प्रकार से होने वाले हिमस्खलन को ग्लेशियर या हिमनद हिमस्खलन कहते
है। इस तरह के हिमस्खलन की घटनाएं प्राय: हिमनदीय क्षेत्रों में घटित होते हैं । भारतदेश में इस प्रकार के हिम
स्खलन ज्यादातर दीर्घ हिमालय तथा कराकोरम में घटित होते हैं|

हिमस्खलन का अर्थ प्रकार व कारण:-

No.3.- शुष्क हिमस्खलन- ऐसी हिमस्खलन की घटनाएं शुष्क एवं ऊंंचे पर्वतों पर होती है । शुष्क हिमस्खलन की
घटना ऊँचे शुष्क पर्वतों में घटित होती है। जब भी ऊँचे पर्वतों में खड़े ढलानों में बहुत अधिक मात्रा में बर्फ इकट्ठी हो
जाती है, तो यह हिम नीचे की ओर खिसकने लगती है| इस कारण से शुष्क हिमस्खलन का खतरा पैदा हो जाता है।
इस प्रकार के हिमस्खलन होने से वायुमंडल के अंदर दूर दूर तक बर्फीला सफेद धुआँ फैल जाता है ।

No.4.-आर्द्र हिमस्खलन पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यधिक ठण्ड के मौसम में अधिक हिमपात होने से या अधिक हिम-वर्षा
के होने से या फिर बर्फ के पिघलने से आर्द्र-हिमस्खलन की स्थिति पैदा हो जाती है| इस प्रकार के हिमस्खलन की
घटनाएं प्रायः शीतोष्ण कटिबंधीय पर्वतों में अक्सर घटित होती रहती हैं ।

हिमस्खलन का अर्थ प्रकार व कारण:-

No.5.- मलबे के ढेर द्वारा हिमस्खलन-इस प्रकार के हिमस्खलन की घटनाएं प्राय पर्वतीय क्षेत्रों में  घटित होती हैं ।
पर्वतीय क्षेत्रों में चट्टानों के लगातार अक्षय होने के कारण ढलानों पर अथवा ढलानों के निचले भाग में बहुत सारा मलबा
इकठ्ठा हो जाता है| यदि उस मलबे पर भारी मात्रा में हिमपात हो जाये, तो हिम और मलबा नीचे की ओर अचानक
खिसकने लग जाता है| हिम तथा मलबे के इस प्रकार के नीचे की ओर खिसकने को मलबा हिमस्खलन कहते हैं।

हिमस्खलन के कारण:-पहाड़ी क्षेत्रों में हर साल होने वाले हिमस्खलन के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:-

No.1.- भारी हिमस्खलन का होना

No.2.- पहाड़ों क्षेत्रों में तीव्र ढलानों को काटकर सड़कें बनाना

No.3.- भारी वर्षा का निरंतर होना

No.4.- ऊँचे अक्षांशों के डेल्टों में अधिक अवसाद होने के कारण

हिमस्खलन का अर्थ प्रकार व कारण:-

No.1.- भारी हिमस्खलन का होना:- ऐसी स्थिति तब देखने को मिलती को जब किसी चट्टान के उपर से
बहुत अधिक मात्रा में हिम नीचे खिसकती हुई आती है, तो यह उस चट्टान को भी अपने साथ तोडती हुई लाती
है, जिससे हिमस्खलन की विकराल स्थिति उत्पन्न हो जाती है|

No.2.- पहाड़ों क्षेत्रों में तीव्र ढलानों को काटकर सड़कें बनाना:-पहाड़ी क्षेत्रों में जब बड़े-बड़े पहाड़ों को
काटकर सड़के, ब्रिज या रेल मार्ग बनाये जाते हैं, तो तीव्र कम्पन के कारण उन पहाड़ों के अंदर दरार पैदा हो
जाती है, जिससे हिमस्खलन आने का खतरा सदैव बना रहता है|

No.3.- भारी वर्षा का निरंतर होना:-बहुत ज्यादा मात्रा में तेज एवं भारी वर्षा के कारण, वर्षा का पानी बड़ी-
बड़ी चट्टानों में से रिस कर, उनमे दरार पैदा कर देता है, जिसके कारण से हिम सहित वे सभी चट्टानें खिसकने
लगती हैं|अत्यधिक वर्षा के कारण हिम से ढकी हुई चट्टाने खिसक कर नीचे तलहटी में आ जाती हैं। इसके
कारण भी बहुत ज्यादा नुकसान होता है।

हिमस्खलन का अर्थ प्रकार व कारण:-

No.4.- ऊँचे अक्षांशों के डेल्टों में अधिक अवसाद होने के कारण:- ऊँचे अक्षांशों के डेल्टों में अधिक अवसादों
के जमा होने के कारण भी हिमस्खलन आने का खतरा हमेंशा बना रहता है|

हिमस्खलन की रोकथाम करने के उपाय(Avalanches Control Strategy):-हिमस्खलनों की रोकने के
लिये निम्न उपाय सुझाये जा सकते हैं:-

No.1.  मोटी लोहे की तारों का जाल बनाकर हिमस्खलनों की रोकथाम करना:-मोटी लोहे की तारों का जाल
बनाकर हिमस्खलनों की रोकथाम की जा सकती है। लोहे की तारों से बने जाल से टकराकर हिम एक सीमित क्षेत्र
तक ही नीचे गिर पाती है जिससे जान- माल का बड़ी मात्रा में नुकसान होने से बच जाता है।उदाहरण के तौर पर
जम्मू-कश्मीर राजमार्ग पर रामसू नामक कस्बे के पास लोहे के तारों का जाल बनााकर हिमस्खलन रोकने के लिए किया गया है।

हिमस्खलन का अर्थ प्रकार व कारण:-

No.2. अत्याधुनिक वैज्ञानिक यंत्रों के उपयोग से:- अत्याधुनिक वैज्ञानिक यंत्रों को सॉफ्टवेयर के साधन भी कहते
हैं। इन अत्याधुनिक वैज्ञानिक यंत्रों के उपयोग के द्वारा ऐसे क्षेत्रों का पता लगाया जा सकता है, जिनमें प्रायः हिमस्खलन
का खतरा अधिक होता है।अत्याधुनिक वैज्ञानिक यंत्रों के उपयोग से ऐसी भविष्यवाणी से हिमस्खलन से होने वाली
हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

No.3. अन्य बचाव के साधनों का प्रयोग करके:- हिमस्खलन वाले क्षेत्रों का पता लगा कर, कंक्रीट की मजबूत
दीवार का निर्माण करना, मोटे लोहे के तारों का जाल बनाना, इनमें अधिक से अधिक वृक्षारोपण किया जा सकता है,
ढलानों को काटकर चकोर रूप देना या चबूतरे का आकार प्रदान करना, इत्यादि बचाव के साधन सम्मिलित हैं।
फ्रांस, जर्मनी जैसे यूरोपीयन देशों में तथा आस्ट्रेलिया आदि देशों में, हिमस्खलन की रोकथाम के बड़े ठोस उपाय
किये गये हैं। भारत में भी हिमस्खलन से प्रभावित इलाकों में इस तरह के उपाय किये जाने चाहिए जिससे जान
और माल की होने वाली बड़ी हानि से बचा जा सके| भारत सरकार के द्वारा भी इस दिशा में अधिक से अधिक कार्य किये जाने चाहिएं